मोतिहारी, 17 सितंबर। Motihari Marriage Registration : विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के लीगल सेल के बिहार-झारखंड प्रमुख एवं अधिवक्ता अशोक श्रीवास्तव के नेतृत्व में बुधवार को विहिप के प्रतिनिधिमंडल ने मोतिहारी रजिस्ट्रार को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से विवाह पंजीकरण से संबंधित प्रक्रिया और अंतरधार्मिक विवाह के मामलों को लेकर संगठन की ओर से अपनी चिंताओं और मांगों को अधिकारियों के समक्ष रखा गया।
विहिप ने किया यह दावा
Motihari Marriage Registration : विहिप की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में दावा किया गया है कि कुछ मामलों में मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू युवतियों को कथित रूप से प्रेम संबंध में फंसाकर विवाह के लिए तैयार किया जाता है और इसके बाद विवाह के पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाता है। संगठन ने इन मामलों को अपने दृष्टिकोण से ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण से जोड़ते हुए इसे गंभीर विषय बताया है। विहिप का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियों की निष्पक्ष जांच और प्रक्रिया की पर्याप्त निगरानी आवश्यक है, ताकि किसी भी व्यक्ति को बहला-फुसलाकर या दबाव में विवाह अथवा धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किए जाने की स्थिति उत्पन्न न हो।

अतिरिक्त सावधानी बरतने की मांग
Motihari Marriage Registration : ज्ञापन में विहिप ने विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में अतिरिक्त सावधानी बरतने की मांग की है। संगठन की ओर से सुझाव दिया गया कि यदि कोई हिंदू युवती किसी मुस्लिम युवक के साथ कोर्ट मैरिज अथवा विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन करती है तो ऐसे मामलों में उसके माता-पिता अथवा अभिभावकों की उपस्थिति और गवाही को भी प्रक्रिया में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। विहिप का तर्क है कि इससे परिवार को जानकारी मिल सकेगी और यदि विवाह के लिए किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या धोखे की स्थिति हो तो उसे समय रहते सामने लाया जा सकेगा।
उचित सत्यापन करने की मांग
Motihari Marriage Registration : विहिप प्रतिनिधियों ने कहा कि विवाह दो व्यक्तियों के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय है और इसमें दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। संगठन ने प्रशासन से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि विवाह पंजीकरण के दौरान संबंधित महिला और पुरुष की स्वतंत्र इच्छा, सहमति तथा कानूनी पात्रता का उचित सत्यापन किया जाए। विहिप ने यह भी कहा कि किसी भी धर्म या समुदाय से जुड़े व्यक्ति के साथ विवाह के मामलों में कानून के प्रावधानों के अनुरूप निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान विहिप नेताओं और अधिवक्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में किसी वैध विवाह को रोकना नहीं, बल्कि उनके अनुसार ऐसे मामलों की पहचान करना है, जिनमें कथित तौर पर धोखे, दबाव, प्रलोभन अथवा धर्म परिवर्तन जैसी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं। संगठन ने प्रशासन से ऐसे मामलों में आवश्यक कानूनी जांच और सतर्कता बरतने की मांग की।
इस अवसर पर विहिप के जिलाउपाध्यक्ष देवेंद्र कुमार सिंह, अधिवक्ता विवेकानंद मिश्र, अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह, अधिवक्ता मनोज कुमार ठाकुर, अधिवक्ता गणेश ठाकुर, अधिवक्ता ध्रुव मिश्र, सुरेश सिंह, राजेंद्र ठाकुर, विजय शंकर सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

संगठन का रखा पक्ष
Motihari Marriage Registration : ज्ञापन सौंपने के बाद विहिप के लीगल सेल के बिहार-झारखंड प्रमुख अशोक श्रीवास्तव, अधिवक्ता ने बयान जारी कर संगठन का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विहिप की नजर में इस प्रकार के मामलों को केवल सामान्य विवाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि जहां धोखे या दबाव के माध्यम से धर्म परिवर्तन की आशंका हो, वहां इसकी कानूनी और सामाजिक स्तर पर गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
अशोक श्रीवास्तव ने धर्मांतरण को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संगठन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को गंभीर विषय मानता है और ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि संगठन की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों पर प्रशासन द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, तो विहिप इस विषय को लेकर व्यापक स्तर पर आवाज उठाएगा।

तो आंदोलन करेगा विहिप
Motihari Marriage Registration : विहिप नेता ने चेतावनी दी कि यदि संगठन के अनुसार इस प्रकार की गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से रोक नहीं लगाई गई तो विश्व हिंदू परिषद इसके खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि विवाह पंजीकरण से जुड़े मामलों में सभी कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी पक्ष के अधिकारों का उल्लंघन न हो।
विहिप की ओर से दिए गए ज्ञापन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मोतिहारी रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से संगठन की मांगों पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और विवाह पंजीकरण से संबंधित नियमों के तहत इस संबंध में क्या कदम उठाए जाते हैं। वहीं, संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को आगे भी प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर उठाता रहेगा।







