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Journalist Protection Order : पत्रकारों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अभिषेक उपाध्याय को अंतरिम राहत; यूपी पुलिस को कार्रवाई से रोका

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Journalist Protection Order as Supreme Court grants interim relief to Abhishek Upadhyay and restrains UP Police action.

नई दिल्ली, 26 अगस्त। Journalist Protection Order : लोकतंत्र में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पत्रकारों की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के अधिकार को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में हस्तक्षेप किया है। पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज कथित रोड रेज मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की किसी भी तरह की कठोर या दंडात्मक कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को बड़ी राहत देते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस को उनके खिलाफ कथित रोड रेज से संबंधित एफआइआर में किसी भी प्रकार की जबरन या कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, शीर्ष अदालत ने पत्रकार को भविष्य में उनके खिलाफ दर्ज होने वाली किसी भी नई एफआइआर के मामले में भी अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है।

यह मामला पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्र पत्रकारिता और सरकार तथा प्रशासन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को उजागर करने वाले पत्रकारों के अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम सुरक्षा

Journalist Protection Order :  सुप्रीम कोर्ट में पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत के समक्ष पत्रकार के खिलाफ दर्ज मामले और उसके पीछे की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने अदालत में दलील दी कि अभिषेक उपाध्याय का कथित रूप से सबसे बड़ा “अक्षम्य अपराध” यह था कि उन्होंने अयोध्या चढ़ावा घोटाले और अन्य कथित घोटालों को उजागर किया था।

अभिषेक उपाध्याय की ओर से यह भी कहा गया कि उनके खिलाफ दर्ज कार्रवाई को स्वतंत्र पत्रकारिता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष तथा स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।

‘अयोध्या चढ़ावा घोटाले’ समेत अन्य कथित मामलों को उजागर करने का मुद्दा उठा

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की पत्रकारिता और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उपाध्याय ने अयोध्या में चढ़ावे से जुड़े कथित घोटाले और अन्य कथित अनियमितताओं को सार्वजनिक किया था।

पत्रकार की ओर से अदालत के सामने यह तर्क रखा गया कि ऐसे मामलों को उजागर करने के बाद उनके खिलाफ दर्ज कार्रवाई को सामान्य परिस्थितियों में नहीं देखा जा सकता और मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने मामले में स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि घटना और उसके बाद की कार्रवाई की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एफआइआर दर्ज करने के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

पूरी एफआइआर की प्रति नहीं दिए जाने पर भी उठे सवाल

Journalist Protection Order :  सुनवाई के दौरान पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की ओर से एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह भी उठाया गया कि उन्हें एफआइआर की पूरी प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने अदालत के सामने एफआइआर की संपूर्ण प्रति उपलब्ध नहीं कराए जाने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने खिलाफ दर्ज मामले की जानकारी और एफआइआर की पूरी प्रति उपलब्ध होना आवश्यक है, ताकि वह कानून के अनुसार अपना पक्ष रख सके और उचित कानूनी कदम उठा सके।

इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया कि पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को उनके खिलाफ दर्ज एफआइआर की प्रति उपलब्ध कराई जाए।

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश, पत्रकार को दी जाए एफआइआर की कॉपी
Journalist Protection Order: Supreme Court Gives Relief to Abhishek Upadhyay
abhishek upadhaya

Journalist Protection Order :  शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि अभिषेक उपाध्याय को संबंधित एफआइआर की प्रति उपलब्ध कराई जाए।

अदालत का यह निर्देश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि याचिकाकर्ता की ओर से लगातार यह सवाल उठाया गया था कि उन्हें मामले से संबंधित पूरी एफआइआर उपलब्ध नहीं कराई गई।

एफआइआर की प्रति मिलने के बाद पत्रकार अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों और पुलिस कार्रवाई से संबंधित कानूनी पक्ष को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे और कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे।

सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की भी मांग

Journalist Protection Order :  अभिषेक उपाध्याय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने कहा कि घटना से संबंधित सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को संरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि यह मामले की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और निष्पक्ष जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

किसी भी विवादित घटना में सीसीटीवी फुटेज एक महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य के रूप में सामने आ सकती है। ऐसे में याचिकाकर्ता की ओर से संबंधित फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की गई, ताकि किसी भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के नष्ट होने या गायब होने की आशंका न रहे।

गाजियाबाद पुलिस आयुक्त से मांगी गई अनुपालन रिपोर्ट

Journalist Protection Order :  सुप्रीम कोर्ट ने केवल अंतरिम सुरक्षा देने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुलिस प्रशासन को अपने निर्देशों के पालन को लेकर भी जवाबदेह बनाया।

शीर्ष अदालत ने गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त से मामले में अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। अदालत के निर्देश के अनुसार पुलिस प्रशासन को यह बताना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किस प्रकार किया गया है।

गाजियाबाद पुलिस आयुक्त से अनुपालन रिपोर्ट मांगा जाना इस बात का संकेत है कि सुप्रीम कोर्ट मामले में दिए गए अपने निर्देशों के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर है।

कथित रोड रेज मामले में जबरन कार्रवाई पर रोक

Journalist Protection Order :  पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज कथित रोड रेज एफआइआर के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को किसी भी तरह की जबरन या कठोर कार्रवाई से रोक दिया है।

अंतरिम राहत के तहत फिलहाल पुलिस पत्रकार के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं कर सकेगी, जिससे उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो।

यह राहत पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में उनके खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाकर उन्हें अंतरिम संरक्षण दिया है।

भविष्य में दर्ज होने वाली एफआइआर पर भी अंतरिम सुरक्षा

Journalist Protection Order :  मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक उपाध्याय को केवल वर्तमान कथित रोड रेज एफआइआर तक सीमित राहत नहीं दी है।

शीर्ष अदालत ने उन्हें भविष्य में दर्ज होने वाली किसी भी एफआइआर के मामले में भी अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। यह निर्देश विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पत्रकार की ओर से यह आशंका व्यक्त की गई थी कि उनकी पत्रकारिता और कथित घोटालों को उजागर करने के कारण उनके खिलाफ आगे भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

हालांकि इस अंतरिम सुरक्षा का विस्तृत कानूनी दायरा सुप्रीम कोर्ट के आदेश और आगे की सुनवाई की परिस्थितियों के अनुसार निर्धारित होगा, लेकिन फिलहाल पत्रकार को शीर्ष अदालत से महत्वपूर्ण राहत मिली है।

पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता पर बड़ा संदेश

Journalist Protection Order :  सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई को पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकतंत्र में पत्रकारों को शासन, प्रशासन और व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

पत्रकारों द्वारा भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों को सामने लाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में पत्रकारों को कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता करने का अवसर मिलना जरूरी है।

निष्पक्ष जांच की मांग ने मामले को बनाया अहम

Journalist Protection Order :  अभिषेक उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग किए जाने के बाद यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि घटना और एफआइआर से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की भी मांग की गई।

मामले में पुलिस को एफआइआर की प्रति उपलब्ध कराने और गाजियाबाद पुलिस आयुक्त से अनुपालन रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

लोकतंत्र में पत्रकारिता की स्वतंत्रता बेहद जरूरी

Journalist Protection Order :  लोकतंत्र की मजबूती के लिए पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वतंत्र पत्रकारिता ही जनता तक उन मुद्दों को पहुंचाती है, जो शासन, प्रशासन और समाज से सीधे जुड़े होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि शीर्ष अदालत ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को अंतरिम राहत देते हुए पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाई और एफआइआर की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

साथ ही गाजियाबाद पुलिस आयुक्त से अनुपालन रिपोर्ट मांगे जाने से यह स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट अपने आदेशों के पालन को लेकर भी गंभीर है।

फिलहाल पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। अब इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया, स्वतंत्र जांच की मांग, सीसीटीवी फुटेज के संरक्षण और पुलिस प्रशासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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