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Hindu Rashtra Thoughts : भारत में हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं, विचारों में होना चाहिए : धीरेंद्र शास्त्री

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Hindu Rashtra Thoughts: Dhirendra Shastri on India, Culture and Unity

Hindu Rashtra Thoughts :  पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों जापान दौरे पर

नई दिल्ली, 24 अगस्त। Hindu Rashtra Thoughts : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों जापान दौरे पर हैं। अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने भारत, सनातन संस्कृति, हिंदू राष्ट्र की अवधारणा, हिंदू समाज की चुनौतियों, नई पीढ़ी यानी जेन जी, सोशल मीडिया, भगवान के अस्तित्व, जापान की व्यवस्था और भारत की विशेषताओं को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को कागजों और कानूनी दस्तावेजों तक सीमित रखने के बजाय लोगों के विचारों, संस्कारों और व्यवहार में स्थापित करने की आवश्यकता है।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनके अनुसार हिंदू राष्ट्र का अर्थ किसी कागजी व्यवस्था या औपचारिक घोषणा से नहीं है, बल्कि यह विचार परिवर्तन और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि जब लोगों के विचार बदलेंगे तो उनके कार्य बदलेंगे और जब कार्यों में परिवर्तन आएगा तो राष्ट्र के चरित्र में भी बदलाव दिखाई देगा।

हिंदू राष्ट्र की अवधारणा वैचारिक है, कागजी नहीं

Hindu Rashtra Thoughts : जब उनसे पूछा गया कि कई लोग हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को संविधान के खिलाफ बताते हैं तो धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनकी कल्पना कागजों पर हिंदू राष्ट्र बनाने की नहीं है। उन्होंने कहा कि वह भारत में हिंदू राष्ट्र को लोगों के विचारों और जीवन मूल्यों में देखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “हम भारत में हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं, विचारों में चाहते हैं। विचार परिवर्तन से कार्य परिवर्तन होगा और विचार परिवर्तन से ही राष्ट्र परिवर्तन होगा। हमारी हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना वैचारिक है, कागजी नहीं है।”

धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार, यदि समाज में सकारात्मक विचार, भारतीय संस्कृति, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत किया जाए तो राष्ट्र का चरित्र अपने आप मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि केवल किसी दस्तावेज में शब्द लिख देने से वास्तविक परिवर्तन नहीं होता, बल्कि परिवर्तन तब होता है जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति उन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाता है।

हिंदू राष्ट्र के लिए सबसे जरूरी है संस्कार और सांस्कृतिक चेतना

Hindu Rashtra Thoughts : हिंदू राष्ट्र बनाने में आने वाली संभावित समस्याओं के सवाल पर बागेश्वर धाम प्रमुख ने कहा कि उनके अनुसार इसमें कोई बड़ी समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता इस बात की है कि देश के हर नागरिक के भीतर भारतीय परंपरा, सनातन संस्कृति और संस्कारों के प्रति सम्मान और चेतना पैदा की जाए।

उन्होंने कहा कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक और समाज के प्रत्येक वर्ग के भीतर भारतीय संस्कृति के प्रति सकारात्मक भावना पैदा होनी चाहिए। जब यह व्यापक रूप से स्वीकार हो जाएगा कि भारतीय सभ्यता और सनातन परंपरा केवल धार्मिक विषय नहीं बल्कि जीवन मूल्यों और संस्कारों की धरोहर है, तब समाज में बड़ा परिवर्तन दिखाई देगा।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि समाज के लोग संस्कारवान, विचारवान, प्रज्ञावान, मेधावान, बलवान और बुद्धिमान बनें, यही सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए। उनके अनुसार, राष्ट्र निर्माण केवल राजनीतिक व्यवस्था से नहीं होता, बल्कि नागरिकों के चरित्र और विचारों से होता है।

क्षेत्रवाद और जातिवाद हिंदू समाज की सबसे बड़ी चुनौतियां

Hindu Rashtra Thoughts : हिंदू समाज की सबसे बड़ी समस्या के सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने क्षेत्रवाद और जातिवाद को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट करने के रास्ते में क्षेत्रीय पहचान और जातिगत विभाजन जैसी प्रवृत्तियां बड़ी बाधा बनती हैं।

उन्होंने कहा, “हिंदू समाज की सबसे बड़ी समस्या क्षेत्रवाद, जातिवाद और उसके बाद प्रदेशवाद है।”

उनके अनुसार, समाज को अपनी विविधताओं के बावजूद व्यापक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता देनी चाहिए। भारत की शक्ति उसकी विविधता में है, लेकिन जब यही विविधता विभाजन का कारण बनने लगती है तो समाज कमजोर होता है। उन्होंने संकेत दिया कि लोगों को जाति और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर व्यापक भारतीय पहचान और सामाजिक एकता पर ध्यान देना चाहिए।

जेन जी के लिए संदेश : रील से ज्यादा रियल लाइफ पर भरोसा करें

Hindu Rashtra Thoughts : आज की युवा पीढ़ी के बीच सोशल मीडिया और खासकर इंस्टाग्राम की बढ़ती लोकप्रियता पर भी धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी राय रखी। उनसे पूछा गया कि आज सुबह उठते ही जेन जी के बहुत से युवा सबसे पहले इंस्टाग्राम खोलते हैं, इस पर वह क्या कहना चाहेंगे।

इस पर उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया चलाना अपने आप में गलत नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का सदुपयोग ज्ञान, सकारात्मकता और अच्छे संस्कारों के प्रसार के लिए किया जा सकता है, जबकि इसका अत्यधिक उपयोग या दुरुपयोग नुकसानदेह हो सकता है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना चाहिए, लेकिन उसका उद्देश्य सार्थक होना चाहिए। अच्छी बातें सीखनी चाहिए, ज्ञानवर्धक सामग्री देखनी चाहिए और अपनी स्क्रीन टाइम को सीमित रखना चाहिए। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “रील से ज्यादा रियल पर भरोसा किया जाए।”

उन्होंने युवाओं को केवल वायरल होने की दौड़ से दूर रहने की सलाह दी। उनके अनुसार, जीवन का उद्देश्य केवल प्रसिद्धि हासिल करना या सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होना नहीं है। वास्तविक जीवन के रिश्ते, अनुभव, शिक्षा, संस्कार और आत्मिक विकास भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग केवल दौड़-भाग को ही सफलता का माध्यम मानने लगे हैं, लेकिन जीवन में धैर्य और खुशी का भी बहुत बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा कि हर समय भागते रहना जरूरी नहीं है। जीवन में पेशेंस यानी धैर्य और हैप्पीनेस यानी खुशी भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि रील देखना या इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करना गलत नहीं है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग और गलत उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना समस्या बन सकता है। सोशल मीडिया को जीवन का साधन बनाना चाहिए, जीवन का पूरा केंद्र नहीं।

भारत को जापान से बहुत कुछ सीखने की जरूरत

Hindu Rashtra Thoughts : जापान दौरे के दौरान वहां की व्यवस्था और संस्कृति से प्रभावित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत को जापान से कई महत्वपूर्ण बातें सीखनी चाहिए। उन्होंने जापान की नियम-पद्धति, व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और लोगों की जीवनशैली की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि जापान की संस्कृति में अनुशासन और व्यवस्था का विशेष महत्व है। वहां के लोग नियमों का पालन करते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने में अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझते हैं।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत को जापान से उसके बेहतर सिस्टम और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से भी सीखने की आवश्यकता है। इसके अलावा उन्होंने जापान के लोगों की खुशहाल जीवनशैली और लंबी आयु पर भी ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने कहा कि जापान के लोग अपने शरीर और स्वास्थ्य के प्रति काफी सतर्क रहते हैं। उनके अनुसार, भारत में भी लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना चाहिए और जीवनशैली में अनुशासन को अधिक महत्व देना चाहिए।

उन्होंने जापान की सामाजिक एकता का जिक्र करते हुए कहा कि वहां क्षेत्रवाद और जातिवाद जैसी प्रवृत्तियां उतनी प्रभावी नहीं दिखाई देतीं, बल्कि वहां राष्ट्रवाद की भावना मजबूत नजर आती है।

जापान को भारत से सीखनी चाहिए अनेकता में एकता और आध्यात्मिकता

धीरेंद्र शास्त्री ने केवल भारत के लिए जापान से सीखने की बात नहीं की, बल्कि यह भी बताया कि जापान भारत से क्या सीख सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक उसकी विविधता और अनेकता में एकता की परंपरा है।

उन्होंने कहा कि जापान को भारत से युवाओं की संस्कृति को बढ़ावा देना और सामाजिक विविधता के बीच एकजुट रहना सीखना चाहिए। भारत में विभिन्न भाषाएं, वेशभूषाएं, परंपराएं और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं, लेकिन इसके बावजूद देश एक राष्ट्रीय पहचान से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा भी दुनिया के लिए सीखने योग्य है। उनके अनुसार, भारत केवल भौतिक प्रगति की बात नहीं करता, बल्कि जीवन के आंतरिक और आध्यात्मिक विकास को भी महत्व देता है।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जापान के लिए भारत से सीखने योग्य सबसे महत्वपूर्ण विषयों में अनेकता में एकता और आध्यात्मिकता शामिल हैं।

भगवान को केवल आंखों से नहीं, अनुभव से समझना चाहिए

Hindu Rashtra Thoughts : जेन जी और आधुनिक सोच के संदर्भ में उनसे पूछा गया कि यदि कोई युवा कहे कि जब तक उसे भगवान के अस्तित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिलेगा, तब तक वह भगवान पर विश्वास नहीं करेगा, तो इस पर उनकी क्या राय है।

इस प्रश्न पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि दुनिया में हर चीज का प्रत्यक्ष प्रमाण संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो आंखों से दिखाई नहीं देतीं, लेकिन उनका अस्तित्व होता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हवा दिखाई नहीं देती, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हवा नहीं है। इसी तरह परमात्मा आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन उसके अस्तित्व को अनुभव किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने अमेरिका नहीं देखा है तो केवल इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि अमेरिका का अस्तित्व नहीं है। इसलिए केवल आंखों से देखने को ही सत्य का एकमात्र आधार नहीं माना जा सकता।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि परमात्मा को देखने का विषय मानने के बजाय उसे अनुभव का विषय समझना चाहिए। उनके अनुसार, आध्यात्मिक अनुभव व्यक्ति के भीतर से जुड़ा होता है।

उन्होंने कहा, “परमात्मा देखने का विषय नहीं है, परमात्मा अनुभव का विषय है और वह अनुभव अपने भीतर होता है।”

भारत अपनी जगह अद्वितीय

Hindu Rashtra Thoughts : जापान पहुंचने के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत की अपनी अलग पहचान और महानता है। उन्होंने कहा कि भारत से बेहतर होने के सवाल पर उनका भाव स्पष्ट है कि हिंदुस्तान अपने आप में अद्वितीय है।

उन्होंने कहा, “भारत, भारत है। सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा, इसमें कोई संदेह नहीं है।”

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जापान आने के बाद वहां की तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर ने उन्हें काफी प्रभावित किया है। उन्होंने जापान के लोगों की सोच और उनके व्यवहार की भी प्रशंसा की।

उनके अनुसार, जापानी समाज में लोगों का व्यवहार सरल और विनम्र है तथा वे नियमों का पालन करते हुए जीवन जीने को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास के साथ अनुशासन और विनम्रता का यह संयोजन जापान की एक बड़ी विशेषता है।

धीरेंद्र शास्त्री ने जापान सरकार और वहां के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जापान में अच्छा अनुभव मिला है। उन्होंने संपूर्ण जापान, वहां की सरकार और वहां के निवासियों को धन्यवाद दिया।

हनुमान जी से भारत के लिए क्या मांगेंगे?

Hindu Rashtra Thoughts : बातचीत के अंत में जब धीरेंद्र शास्त्री से पूछा गया कि यदि उन्हें भगवान हनुमान से भारत को बदलने के लिए कुछ मांगना हो तो वह क्या मांगेंगे, तो उनका जवाब काफी संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण था।

उन्होंने कहा कि भारत के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए वह शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार की कामना करेंगे। उनके अनुसार, किसी भी देश की प्रगति के लिए मजबूत शिक्षा व्यवस्था और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद जरूरी हैं। यदि देश का युवा शिक्षित, जागरूक और स्वस्थ होगा तो राष्ट्र का भविष्य भी मजबूत होगा।

विचार, संस्कार और अनुशासन से मजबूत होगा राष्ट्र

Hindu Rashtra Thoughts : जापान से दिए अपने संदेश में धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को वैचारिक परिवर्तन से जोड़ा। उन्होंने सामाजिक एकता, जातिवाद और क्षेत्रवाद से ऊपर उठने, युवाओं को सोशल मीडिया के संतुलित उपयोग, जापान से अनुशासन और तकनीकी व्यवस्था सीखने तथा भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर दिया।

उनकी बातचीत का मुख्य संदेश यही रहा कि राष्ट्र का वास्तविक परिवर्तन केवल कानूनों और दस्तावेजों से नहीं बल्कि नागरिकों के विचारों, संस्कारों, व्यवहार और जीवनशैली में परिवर्तन से आता है। उन्होंने जहां भारत को जापान की तकनीक, अनुशासन और व्यवस्था से सीखने की बात कही, वहीं जापान के लिए भारत की आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक विविधता और अनेकता में एकता को सीखने योग्य बताया।

अंततः धीरेंद्र शास्त्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य को भारत के विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया और कहा कि एक संस्कारवान, विचारवान, शिक्षित और स्वस्थ समाज ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।

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