नागपुर, 25 जुलाई। Dharmendra Pradhan Resignation : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत पर भी तीखा हमला बोला है।
नागपुर और मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग अब केवल किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे विपक्ष की साझा लड़ाई बन चुकी है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
राउत ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने साफ किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर विपक्ष का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और वह पीछे हटने वाला नहीं है।
मोहन भागवत को दी सीधी चुनौती, बोले- सफाई से नहीं बदलेगा माहौल
Dharmendra Pradhan Resignation : संजय राउत ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब केवल स्पष्टीकरण देने से बात नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि यदि संघ वास्तव में इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है तो उसे स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
राउत ने मोहन भागवत से मांग की कि वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात सीधे तौर पर उठाएं। उनके अनुसार, लगातार सफाई और तर्क देने से जनता का भरोसा मजबूत नहीं हो रहा है, बल्कि सवाल और बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आरएसएस देश की एक बड़ी सामाजिक और वैचारिक संस्था है, इसलिए उससे जनता उम्मीद करती है कि वह महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। राउत ने आरोप लगाया कि इस मामले में संघ की चुप्पी लोगों के बीच कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रही है और इससे संगठन की छवि प्रभावित हो रही है।
“छात्रों से संवाद नहीं, पहले प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से बात करें”
Dharmendra Pradhan Resignation : संजय राउत ने मोहन भागवत के लिए कहा कि छात्रों से बातचीत करने की सलाह देने के बजाय उन्हें पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संवाद करना चाहिए।
राउत के मुताबिक, यदि कोई गंभीर राजनीतिक या प्रशासनिक विवाद खड़ा होता है तो उसका समाधान जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के फैसले से ही संभव है। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत को सीधे सरकार के शीर्ष नेतृत्व से बात कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को आगे बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि जनता अब केवल बयान नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहती है। राउत ने कहा कि सरकार और संबंधित संस्थाओं को जनता के सवालों का जवाब देना होगा।
“इस्तीफा नहीं दिला सकते तो नागपुर वापस न आएं”: राउत का बड़ा बयान
संजय राउत ने अपने बयान में तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि अगर मोहन भागवत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं दिला सकते तो उन्हें नागपुर वापस नहीं आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नागपुर को आरएसएस का मुख्य केंद्र माना जाता है और ऐसे में संघ की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। राउत ने आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद में संघ की चुप्पी लोगों के मन में असमंजस पैदा कर रही है।
हालांकि, राउत का यह बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आया है, जहां विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है और सत्ता पक्ष अपने फैसलों और नीतियों का बचाव कर रहा है।
सुरक्षा बढ़ाने के फैसले पर भी सरकार को घेरा
Dharmendra Pradhan Resignation : संजय राउत ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की सुरक्षा बढ़ाने के फैसले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस कदम पर व्यंग्य करते हुए कहा कि यह एक ऐसा फैसला है जो लंबे समय बाद देखने को मिला है।
राउत ने तंज कसते हुए कहा कि वर्षों तक गृह विभाग संभालने के बाद अब सरकार को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इतनी चिंता दिखाई दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अचानक जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत क्यों महसूस हुई।
उन्होंने कहा कि सरकार को शायद बाहर बढ़ते विरोध और जनता की नाराजगी का एहसास होने लगा है, इसलिए सुरक्षा इंतजामों को मजबूत किया जा रहा है।
“जेन जेड तूफान” का डर या बदलते राजनीतिक हालात?
संजय राउत ने सुरक्षा बढ़ाने के फैसले को युवाओं के बढ़ते असंतोष से जोड़ते हुए कहा कि सरकार को अब “जेन जेड तूफान” का डर सताने लगा है।
उनका कहना था कि नई पीढ़ी अपने सवालों को लेकर ज्यादा मुखर हो रही है और सरकार को जनता की आवाज सुननी चाहिए। राउत ने दावा किया कि युवाओं के बीच बढ़ती नाराजगी और सरकार के प्रति असंतोष के कारण ही ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से सुरक्षा बढ़ाने के फैसले को लेकर अलग तर्क दिए जा सकते हैं, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक माहौल से जोड़कर देख रहा है।
सियासी संग्राम में बढ़ी गर्मी, अब नजर सरकार के अगले कदम पर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और इस पर संजय राउत के हमले ने महाराष्ट्र से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक बहस तेज कर दी है। विपक्ष जहां इस मुद्दे को जवाबदेही से जोड़ रहा है, वहीं सरकार और उसके समर्थक पक्ष इस पर अलग रुख रखते हैं।
मोहन भागवत को लेकर दिए गए राउत के बयान ने राजनीतिक चर्चा को और गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि इस पूरे विवाद पर केंद्र सरकार, आरएसएस और अन्य राजनीतिक दल आगे क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
फिलहाल, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सियासी घमासान जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक चर्चा में रहने की संभावना है।






