निवेदिता झा, मोतिहारी। Sparrow Conservation : अक्सर देखा जाता है कि कोई प्रतियोगिता या खेल जीतने के बाद लोग ऐशो-आराम और निजी सुख-सुविधाओं में जीवन व्यतीत करने लगते हैं, लेकिन मोतिहारी के निवासी और कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) में पांच करोड़ रुपये जीतने वाले सुशील कुमार ने एक बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक राह चुनी। उन्होंने अपनी पहचान केबीसी विजेता से आगे बढ़ाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बनाई है।
कर रहे हैं पीएचडी
Sparrow Conservation : सुशील कुमार वर्तमान में पीएचडी कर रहे हैं और साथ ही पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बना चुके हैं। उनकी सबसे चर्चित पहल ‘गौरैया बचाओ अभियान’ है, जिसके माध्यम से वे लुप्त होती गौरैया को बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस अभियान के तहत अब तक वे हजारों घरों में लकड़ी के घोंसले लगवा चुके हैं, ताकि गौरैया को सुरक्षित आश्रय मिल सके।
सुशील कुमार बताते हैं कि कुछ दशक पहले तक खपरैल और पुराने घरों की बनावट में गौरैया को घोंसला बनाने के लिए पर्याप्त जगह मिल जाती थी। घरों की दीवारों, छज्जों और छतों में बने छोटे-छोटे कोने उनके लिए प्राकृतिक आवास हुआ करते थे। लेकिन समय के साथ मकानों में बदलाव और बदलती वास्तुकला ने गौरैया से उनका आशियाना छीन लिया। यही वजह है कि आज गौरैया की संख्या घटती जा रही है।
पर्यावरण संतुलन का अहम हिस्सा
Sparrow Conservation : उन्होंने कहा कि गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन का अहम हिस्सा है। यह पक्षी बेहद संवेदनशील होता है और नकारात्मक वातावरण में रहना पसंद नहीं करता। जहां नकारात्मकता होती है, वहां गौरैया टिकती नहीं और उस स्थान को छोड़ देती है। वहीं, जहां सकारात्मक ऊर्जा होती है, वहां वह खुशी-खुशी वास करती है।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार
Sparrow Conservation : सुशील कुमार का मानना है कि गौरैया न सिर्फ सकारात्मक वातावरण का संकेत देती है, बल्कि स्वयं भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। जब घर-आंगन में गौरैया चहचहाती हैं तो वातावरण में एक सुकून और सकारात्मकता फैल जाती है। उनके अनुसार, गौरैया की चहचहाहट केवल मधुर ध्वनि नहीं, बल्कि प्रकृति की ऊर्जा का प्रतीक है।
धरती पर सभी का अधिकार
Sparrow Conservation : पर्यावरण संरक्षण को लेकर सुशील कुमार की सोच बेहद स्पष्ट है। वे कहते हैं, “इस धरती पर सिर्फ इंसानों का अधिकार नहीं है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और सभी जीव-जंतु इस प्रकृति का अभिन्न हिस्सा हैं। यदि हम केवल अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का दोहन करते रहेंगे तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।”
फैला रहे जागरूकता
Sparrow Conservation : अपने अभियान के तहत सुशील कुमार न केवल घोंसले लगवा रहे हैं, बल्कि लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। वे लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे अपने घरों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर गौरैया के लिए घोंसले लगाएं, नियमित रूप से दाना और पानी रखें तथा पेड़-पौधों को संरक्षित करें। उनका मानना है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं।
फिलहाल सुशील कुमार पीएचडी की पढ़ाई के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उनका जीवन आज इस बात का उदाहरण बन चुका है कि धन से बड़ी जिम्मेदारी होती है और सच्ची सफलता वही है, जो समाज और प्रकृति के काम आए। ‘गौरैया बचाओ अभियान’ के जरिए सुशील कुमार न केवल एक पक्षी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी घर-घर पहुंचा रहे हैं।
Author: Nivedita Jha
Nivedita Jha is a graduate from Baba Saheb Bhimrao Ambedkar University. She is also a double post graduate. She has also done journalism. She has five years of experience in journalism.







