कोलकाता, 21 दिसंबर। Hindu Rashtra Statement : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कोलकाता में आयोजित संघ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत स्वभाव से हिंदू राष्ट्र है और यह सत्य कभी बदलने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में भले ही ‘हिंदू’ शब्द का उल्लेख नहीं है, लेकिन उसमें निहित मूल्य पूरी तरह से हिंदुत्व की भावना को दर्शाते हैं।
‘बंधु भाव’ को ही धर्म बताया था
Hindu Rashtra Statement : मोहन भागवत ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में सभी धर्मों को उपासना की स्वतंत्रता, न्याय, स्वतंत्रता और समानता की बात कही गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि ये मूल्य आखिर कहां से आए हैं। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने स्वयं कहा था कि ये मूल्य उन्होंने फ्रांस से नहीं, बल्कि गीता, सागर और बुद्ध से लिए हैं। संसद में दिए गए अपने भाषण में अंबेडकर ने ‘बंधु भाव’ को ही धर्म बताया था।
भागवत ने कहा कि धर्म पर आधारित संविधान किसी विशेष धर्म की नहीं, बल्कि हिंदू राष्ट्र की विशेषता है। हिंदू शब्द का प्रयोग भले ही नहीं किया गया हो, लेकिन संविधान के निर्माण में हिंदू संस्कृति और मूल्यों की स्पष्ट छाया दिखाई देती है।
हिंदू राष्ट्र की अवधारणा बहुत प्राचीन
Hindu Rashtra Statement : उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा बहुत प्राचीन है। सूर्य पूर्व दिशा से उगता है, लेकिन यह कब से उग रहा है, इसका कोई दस्तावेज नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि क्या इसके लिए भी संविधान की मंजूरी चाहिए? उन्होंने दो टूक कहा कि हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है और रहेगा। जब तक भारत की धरती पर एक भी ऐसा व्यक्ति जीवित है, जो भारत को अपनी मातृभूमि मानता है, भारतीय संस्कृति में आस्था रखता है और अपने पूर्वजों के गौरव को मानता है, तब तक भारत हिंदू राष्ट्र बना रहेगा।
संसद चाहे तो ‘हिंदू राष्ट्र’ शब्द जोड़े
Hindu Rashtra Statement : मोहन भागवत ने कहा कि अगर संसद चाहे तो ‘हिंदू राष्ट्र’ शब्द को जोड़ सकती है और अगर न भी जोड़े तो कोई फर्क नहीं पड़ता। शब्द महत्वपूर्ण नहीं है, सत्य महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हम हिंदू हैं और हमारा राष्ट्र हिंदू राष्ट्र है, चाहे यह कहीं लिखा हो या न लिखा हो।
भाजपा और आरएसएस के बीच कथित दूरी को लेकर उठ रहे सवालों पर मोहन भागवत ने स्पष्ट कहा कि उन्हें ऐसी चर्चाएं समझ में नहीं आतीं। उन्होंने कहा कि संघ हमेशा से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से दूरी बनाए रखता आया है, चाहे जनसंघ का समय रहा हो या वर्तमान। हालांकि, संघ के स्वयंसेवक भाजपा में हैं और वही संघ से जुड़े रहते हैं।
अमित शाह स्वयं संघ के स्वयंसेवक
Hindu Rashtra Statement : उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह स्वयं संघ के स्वयंसेवक हैं, जैसे कई अन्य नेता भी हैं। इसलिए उनके साथ निकटता स्वाभाविक है। इसमें राजनीति नहीं, बल्कि संगठनात्मक संबंध हैं। मीडिया द्वारा दूरी और नजदीकी को लेकर जो चर्चाएं की जाती हैं, वे वास्तविकता से परे हैं।
संघ के संबंध सभी दलों के लोगों से
Hindu Rashtra Statement : संघ को एक निर्मल और पारदर्शी संगठन बताते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ के संबंध सभी दलों के लोगों से हैं और इसमें कुछ भी छिपा हुआ नहीं है। जो भी संपर्क होते हैं, वे खुले तौर पर होते हैं।
संघ के उद्देश्य पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ का लक्ष्य समाज को संगठित करना और हिंदू समाज को मजबूत बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के अंदर हिंदू समाज बनाना लक्ष्य नहीं है, बल्कि पूरे समाज को संगठित करना उद्देश्य है। यह कार्य पश्चिम बंगाल और पूरे देश में कब पूरा होगा, यह भविष्य बताएगा।
हिंदू समाज को संगठित करना तय
Hindu Rashtra Statement : उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को संगठित करना तय है। अगर यह काम कल सुबह तक हो सकता है, तो कल ही करेंगे। अगर इसमें समय लगेगा, तो तब तक करते रहेंगे जब तक लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता। रास्ते में बाधाएं आएंगी, लेकिन संघ रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ को आगे बढ़ाने के लिए ही उनका जन्म हुआ है और अगर यह कार्य इस जीवन में पूरा नहीं हुआ, तो अगले जन्म में भी वे इसी उद्देश्य के लिए कार्य करेंगे।







