नई दिल्ली, 10 दिसंबर। Voter List Reform : लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को सदन में कहा कि कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर देश और जनता को गुमराह करने का प्रयास किया।
अमित शाह ने कहा कि सत्र की शुरुआत में दो दिन का गतिरोध हुआ, जिससे यह गलतफहमी बनी कि भाजपा और एनडीए चर्चा से भाग रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा और एनडीए सदैव चर्चा में भाग लेते हैं, लेकिन यह चर्चा संसद के नियमों के अनुसार होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विपक्ष एसआइआर पर चर्चा के लिए अड़ा हुआ था, जबकि यह विषय चुनाव आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ा है। अमित शाह ने कहा, “चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त सरकार के अधीन काम नहीं करते। यदि सदन में एसआइआर पर चर्चा होती भी है, तो सवालों का जवाब कौन देगा?”
विपक्ष ने फैलाया झूठ
Voter List Reform : केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष ने चार महीने से एसआइआर पर एकतरफा झूठ फैलाया और जनता को भ्रमित करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं एसआइआर की प्रक्रिया और इससे जुड़े संवैधानिक अनुबंधों का गहन अध्ययन किया है।
चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था
Voter List Reform : अमित शाह ने सदन को बताया कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि चुनाव आयोग की शक्तियाँ, चुनाव प्रक्रिया, मतदाता की सूची तैयार करने और उसमें सुधार करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग को दी गई है।
उन्होंने कहा कि जब ये संवैधानिक प्रावधान बनाए गए, तब भाजपा भी अस्तित्व में नहीं थी। संविधान सभा में चर्चा के बाद संविधान में चुनाव आयोग का गठन किया गया। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति के चुनाव का संपूर्ण नियंत्रण दिया गया है।
राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं
अमित शाह ने निष्कर्ष देते हुए कहा कि मतदाता सूची और चुनाव सुधारों की जिम्मेदारी पूरी तरह चुनाव आयोग की है। इसे लेकर कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।







