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Janmashtami: क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी, आप भी जानें इसका आध्यात्मिक महत्व

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Janmashtami
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निवेदिता झा, नयी दिल्ली। Janmashtami : आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी है। देश-विदेश में बड़े ही उत्साह, उमंग और धूम-धाम के साथ यह पर्व मनाया जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव है। अभी देशभर के मंदिरों और घरों में कान्हा का श्रृंगार और भोग अर्पित किया जा रहा है।

आइए जानते हैं क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। श्री कृष्ण को विष्णु जी का आठवां अवतार माना जाता है। श्री कृष्ण का जन्म देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में हुआ था। उनके जन्म के समय वासुदेव और देवकी जी कंस के कारागार में कैद थे। कंस, देवकी का भाई था, जिसने भविष्यवाणी सुनी थी कि देवकी का आठवां पुत्र उसे मार डालेगा, इसलिए उसने देवकी के सभी बच्चों को मारने का आदेश दिया था।

तब लग गई थी पहरेदारों की आंख

Janmashtami :लेकिन जब श्री कृष्ण का जन्म हुआ, तब पूरा कारागार प्रकाशमय हो गया। कंस के सभी पहरेदारों के आंख लग गई और ठीक उसी वक्त नन्द और यशोदा ने एक सुंदर कन्या को जन्म दिया। अब जब यह भविष्यवाणी हुई थी कि वासुदेव और देवकी के आठवें पुत्र के हाथों ही कंस का वध होना है। तब वासुदेव ने अपने पुत्र को बचाने के लिए श्री कृष्ण को नन्द और यशोदा के घर छोड़ने और उनकी पुत्री को अपने पास लाने का निर्णय लिया और उसी क्षण वासुदेव जी श्री कृष्ण को ले कर नन्द के घर की ओर चले।

यह भी है मान्यता

Janmashtami : ऐसी मान्यता है कि उस दिन काफी तेज हवा के साथ बरसात हो रही थी और यमुना जी भी उफान पर थी लेकिन वासुदेव को अपने पुत्र को बचाने के लिए नदी पार करनी ही थी। माना जाता है कि यमुना जी उस दिन श्री कृष्ण के चरण स्पर्श के लिए ही इतनी उफान पर थी जैसे ही श्री कृष्ण का चरण स्पर्श हुआ यमुना जी ने खुद ही रास्ता दे दिया।

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नादिया: शनिवार, 16 अगस्त, 2025 को नादिया में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण के रूप में सजे बच्चों का श्रृंगार करती एक महिला।
तब होने लगी थी तेज बारिश

Janmashtami : मान्यता ये भी है कि जब काफी तेज बरसात होने लगी तब शेषनाग ने अपना फन फैला कर श्री कृष्ण को बरसात से बचाया था। श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र के दिन रात्री के 12 बजे हुआ था। इस दिन को हिन्दू धर्म में काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन भक्त जन्माष्टमी मनाते हैं। श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं। साथ ही उनके जन्म के समय की घटनाओं को याद करते है। पूरा दिन व्रत रखने के बाद रात्रि के 12 बजे व्रत खोलते हैं।

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