ओम वर्मा, नयी दिल्ली। SIR : बिहार में चल रहे मतदाता पुनरीक्षण का मामला गरमाता ही जा रहा है। आखिर क्या वजह है कि एनडीए को छोड़कर बाकी सभी दल इसका विरोध कर रहे हैं। खासकर इसकी टाइमिंग को लेकर। अधिकतर दलों का कहना है कि मतदाता पुनरीक्षण का समय गलत है। या तो इसे पहले करा लिया जाता या इसे बिहार चुनाव के बाद कराया जाता। यह स्थिति तब है जब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। दूसरी ओर बिहार में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने विधानसभा चुनाव का बॉयकॉट करने का संकेत दिया है। उनका कहना है कि पहले वोटर, सरकार चुनती थी जबकि अब सरकार अपने वोटर चुन रही है। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। सरकार राजशाही को वापस लाना चाहती है।
टाइमिंग पर सवाल
SIR :अधिकतर राजनीतिक दलों का कहना है कि वह मतदाता पुनरीक्षण के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन इसकी टाइमिंग गलत है। बिहार चुनाव के ठीक पहले इसे लागू करना उचित नहीं जान पड़ता। कई पार्टियों के तर्क में दम भी नजर आता है क्योंकि बहुत सारे ऐसे मतदाता हैं जो इस समय बिहार में अपने घर पर उपलब्ध नहीं होंगे। ऐसे में उन्हें अपने पते पर अनुपस्थित बताकर उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। बहुत सारे ऐसे मतदाता हैं जो राज्य के बाहर कमाने गए हुए हैं। उनके घर में कोई भी उपलब्ध नहीं है। अब सवाल उठता है कि ऐसे मतदाताओं का क्या होगा।
इतनी जल्दी क्या वास्तव में है संभव
SIR :निर्वाचन आयोग का कहना है कि बिहार में एसआइआर का अधिकतर काम पूरा कर लिया गया है। वोटर धड़ाधड़ अपने फार्म जमा करा रहे हैं। यही वजह है कि बहुत जल्दी चुनाव आयोग ने 90 प्रतिशत से अधिक का लक्ष्य हासिल कर लिया है। हालांकि चुनाव आयोग यह नहीं बता पा रहा है कि जिन लोगों के पास अनिवार्य कागजात उपलब्ध नहीं हैं, उनका क्या होगा।
चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता पुनरीक्षण में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है, जबकि ग्राउंड रिपोर्ट कुछ और है। इसी मामले में खामियां उजागर करने पर पत्रकार अजीत अंजुम पर मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है, जबकि अगर कोई पत्रकार खामियां उजागर कर रहा है तो उसे गंभीरता से लेकर खामियों को दूर करना चाहिए।
कांग्रेस का आरोप
SIR :मतदाता पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों के सांसदों ने कई सारे सवाल उठाए हैं। इस बीच कांग्रेस सासंद कार्ति चिदंबरम ने एसआइआर को “क्रो कानून” करार दिया।
वहीं, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा, “चुनाव आयोग जो कर रहा है, वो पूरी तरह से गलत है। चुनाव आयोग को नागरिकता की जांच का कोई अधिकार ही नहीं है। अगर नागरिकता पर कोई सवाल है, तो वह गृह मंत्रालय का काम है।
उधर संसद के दोनों सदनों में कार्य बाधित है। विपक्षी दलों के नेता लगातार हंगामा कर रहे हैं। अब देखना है कि सरकार इस मसले पर क्या फैसला करती है।
Author: ohm verma
Om Verma (ohm verma) is a graduate from Motilal Nehru College of Delhi University. He has done Journalism and Mass Communication from Kurukshetra University. He has worked in Hari Bhoomi newspaper published from Haryana. After this, he worked for Dainik Jagran as Chief Sub Editor for a long time. He held many important roles in the Noida office. During this time, he participated in debates on many national TV channels.







